भारत का म्यूचुअल फंड उद्योग लंबी अवधि के निवेश और पैसिव इन्वेस्टिंग की ओर बढ़ रहा है: रिपोर्ट | Mutual Fund News

भारत का म्यूचुअल फंड उद्योग अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है, जहां निवेशक कम लागत वाले, इंडेक्स-ट्रैकिंग निवेश विकल्पों की ओर तेजी से झुक रहे हैं। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पैसिव इन्वेस्टिंग की लोकप्रियता पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गई है।

पैसिव फंड्स में तेज़ बढ़त

मोतीलाल ओसवाल फाइनैन्शल सर्विसेज़ के रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2021 से सितंबर 2025 के बीच ETFs का AUM CAGR 28% रहा, जबकि इंडेक्स फंड्स ने 81% CAGR की तेज़ बढ़त दिखाई। इसी अवधि में कुल इक्विटी AUM भी 28% बढ़ा है। पैसिव फंड्स का हिस्सा Quarterly Average AUM में सितंबर 2025 तक 17.1% तक पहुंच गया, जबकि FY20 में यह केवल 7% था। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, “भारत का म्यूचुअल फंड लैंडस्केप पैसिव इन्वेस्टिंग की ओर एक संरचनात्मक बदलाव देख रहा है,” जो निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को स्पष्ट दर्शाता है।

FY25 पैसिव इन्वेस्टिंग के लिए टर्निंग पॉइंट

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि FY25 पैसिव फंड्स के लिए एक ब्रेकआउट वर्ष साबित हुआ। पैसिव फंड्स में नेट इनफ्लो पिछले वर्ष की तुलना में 118% बढ़ गया। इंडेक्स फंड में प्रवाह 278% बढ़ा, जबकि ETF इनफ्लो में 59% की वृद्धि हुई। यह दिखाता है कि कम खर्च वाले, मार्केट-ट्रैकिंग निवेश विकल्प अब बड़े पैमाने पर निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं।

यह पढ़े: Mahindra Manulife Arbitrage Active FOF NFO: FD से बेहतर रिटर्न का मौका? पूरी जानकारी

FY26 YTD में इनफ्लो में हल्की गिरावट

हालांकि, अप्रैल से अक्टूबर 2025 (YTDFY26) के दौरान पैसिव फंड्स के प्रवाह में थोड़ी नरमी देखी गई। इस अवधि में पैसिव इनफ्लो साल-दर-साल 34% गिरा, जबकि इक्विटी फंड फ्लो में 8% की कमी आई। रिपोर्ट का मानना है कि यह गिरावट हाई बेस इफेक्ट और निवेशकों की रूचि का एक्टिव श्रेणियों—जैसे फ्लेक्सी-कैप और मिड-कैप फंड्स—की ओर अस्थायी बदलाव के कारण हुई।

लंबे समय के लिए पैसिव फंड्स का भविष्य मजबूत

रिपोर्ट में बताया गया कि थोड़ी गिरावट के बावजूद पैसिव इन्वेस्टिंग का लंबी अवधि का भविष्य बेहद सकारात्मक है। कम लागत वाले उत्पादों में बढ़ता विश्वास, अधिक विकल्पों की उपलब्धता और संस्थागत निवेशकों द्वारा पैसिव फंड्स की बढ़ती स्वीकार्यता इस ट्रेंड को और मजबूती दे रही है।

एक्टिव फंड्स अब भी महत्वपूर्ण

रिपोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि एक्टिव फंड्स अभी भी उद्योग के विकास में अहम भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि पैसिव फंड्स का हिस्सा बढ़ता रहेगा, लेकिन कम खर्चीली संरचना के कारण पैसिव फंड्स से मिल रहे स्केल फायदे एसेट मैनेजमेंट कंपनियों की कुल लाभप्रदता को मजबूत बनाए रखेंगे।

यह पढ़े: Bandhan Mutual Fund ने बढ़ाई UPI लिमिट: अब ₹5 लाख तक का निवेश UPI से संभव

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top