Mutual Fund Investment: म्यूचुअल फंड में निवेश करना देखने में आसान लगता है—SIP शुरू करो, पैसे बढ़ने दो, और लंबी अवधि में बड़ा कॉर्पस बनाओ। लेकिन असलियत में, अच्छे रिटर्न मिलने से पहले निवेशक को कई भावनात्मक और मानसिक उतार–चढ़ाव झेलने पड़ते हैं। कभी XIRR कन्फ्यूज़ करता है, कभी मार्केट गिरता है, कभी पोर्टफोलियो माइनस में जाता है—और दिमाग में एक ही सवाल आता है: अब क्या करू?
1. XIRR का भ्रम: रिटर्न कभी ज्यादा, कभी कम क्यों दिखता है?
XIRR (Extended Internal Rate of Return) आपकी SIP या Lump-sum Investment का Annualized Return दिखाता है। लेकिन शुरुआत में यह बहुत कन्फ्यूज़िंग लगता है क्योंकि:
- हर SIP की तारीख और अमाउन्ट के कारण XIRR ऊपर नीचे करता है
- थोड़ी सी गिरावट पर XIRR अचानक नेगेटिव दिख सकता है
- आधा पैसा निकालना भी रिटर्न कैल्क्यलैशन को बिगाड़ देता है
उदाहरण: अगर आपने 2022 में SIP शुरू की, तो 2023 की गिरावट में XIRR -8% भी दिख सकता था। लेकिन 2025 में मार्केट रिकवरी के बाद वही XIRR 15% से ज्यादा हो सकता है।
सीख: XIRR को हर महीने चेक करके टेंशन मत लीजिए। Long-term CAGR (5–10 साल) ही असली परफॉरमेंस बताता है।
2. मार्केट गिरावट: हर निवेशक की सच्ची परीक्षा
जब Nifty या Sensex अचानक 5–10% गिरता है, ऐसा लगता है कि आपकी सारी मेहनत खत्म हो गई।
लेकिन सच ये है कि:
- 5–10% करेक्शन हर साल आती हैं
- 20%+ गिरावट हर 3–4 साल में आती है
यह मार्केट का स्वभाव है।
उदाहरण: COVID-19 क्रैश (मार्च 2020) में Sensex 42,000 से गिरकर 26,000 पहुंच गया — यानी 38% क्रैश! लेकिन अगले 18 महीनों में Sensex 60,000 के पार चला गया। जिस निवेशक ने उस समय SIP जारी रखी, उसका रिटर्न 30–40% CAGR तक पहुंच गया। यानी गिरावट डरने की नहीं, मौका देने की चीज़ है।
3. डर और शंका: “शायद अब Profit बुक कर लूं?”
हर निवेशक इन सवालों से गुजरता है:
- “SIP रोक दूं?”
- “मार्केट शांत हो जाए तब निवेश करूंगा।”
ये सब Loss Aversion Bias की वजह से होता है— हम नुकसान के डर से डरते हैं, भले ही Long Term में फायदा मिलने वाला हो।
AMFI के डेटा के अनुसार:
- 2 साल के अंदर SIP बंद करने वाले निवेशक 10 साल में 40–60% कम रिटर्न कमाते हैं
- जो SIP जारी रखते हैं, वो हमेशा बेहतर प्रदर्शन करते हैं
भविष्य की भविष्यवाणी करने से बेहतर है—नियमित निवेश जारी रखना।
4. नेगेटिवे रिटर्न वाले महीने: Perspective ज़रूरी है
Equity Mutual Funds के 10 साल के रिकॉर्ड में:
- 20–30 महीने नेगेटिव हैं
- कुछ साल भी पूरे नेगेटिव हो सकते हैं
फिर भी Long-Term SIP शानदार रिटर्न्स देती है। Large-Cap Funds 2022 में -6% गिरे थे, लेकिन 2023 में 18% से ज्यादा का रिटर्न दे गए।
इसी तरह Nifty 50 में ₹10,000 की SIP (2013–2023):
- कुल निवेश: ₹12 लाख
- कॉर्पस बना: लगभग ₹24.5 लाख
- रिटर्न: 12.2% CAGR
Long-Term चार्ट देखने पर छोटे-छोटे झटके गायब हो जाते हैं।
5. निवेश जारी रखने की ताकत: Time > Timing
Warren Buffett कहते हैं:
स्टॉक मार्केट उन लोगों से पैसा लेता है जो अधीर हैं, और उन लोगों को पैसा देता है जो धैर्यवान है।
AMFI की स्टडी (2024) के अनुसार:
| निवेश अवधि | पोसिटीव रिटर्न की संभावना |
|---|---|
| 1 साल | 70% |
| 3 साल | 85% |
| 5 साल | 93% |
| 10 साल | 100% |
यानी Indian Equity Mutual Funds ने 10 साल में कभी नेगेटिव रिटर्न नहीं दिया। मार्केट को टाइमिंग करने वाले हारते हैं। मार्केट में समय बिताने वाले जीतते हैं।
अंतिम सीख: शांत रहो, नियमित रहो, पैसा खुद चलकर आएगा
म्यूचुअल फंड निवेश सिर्फ पैसा लगाने का काम नहीं है—यह एक ईमोशनल जर्नी भी है।
अगर आप:
- SIP नियमित रखते हैं,
- गिरावट में पैनिक नहीं करते
- लॉंग टर्म गिरावटों को प्रोसेस का हिस्सा मानते हैं,
तो आपका पैसा आपके लिए वो काम करेगा, जिसे Compounding कहते हैं— धीरे-धीरे, लेकिन बेहद शक्तिशाली तरीके से। अगली बार जब XIRR गिरता दिखे या मार्केट माइनस में जाए, याद रखना: “रिटर्न से पहले आने वाली ये परीक्षा ही असली प्रॉफ़िट का रास्ता बनाती है।”
इसे पढ़े: Abakkus Flexi Cap Fund NFO: क्या आपको निवेश करना चाहिए?
Disclaimer: म्यूचुअल फंड निवेश बाज़ार के जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी स्कीम संबंधित दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें। पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता। बाज़ार स्थितियों के अनुसार निवेश का मूल्य बढ़ भी सकता है और घट भी सकता है। किसी भी निवेश से पहले अपने जोखिम स्तर, निवेश अवधि और आवश्यकता अनुसार वित्तीय सलाहकार की राय ज़रूर लें।