म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले हर व्यक्ति के लिए NAV यानी नेट एसेट वैल्यू को समझना बेहद ज़रूरी है। NAV आपको बताता है कि आपके चुने हुए म्यूचुअल फंड की एक यूनिट की कीमत कितनी है। यह कीमत फंड की कुल संपत्ति और कुल यूनिट्स के आधार पर तय होती है।
NAV कैसे Calculate होता है?
NAV की गणना एक सरल फॉर्मूला से की जाती है। फंड की कुल एसेट्स में से उसकी कुल देनदारियाँ घटाई जाती हैं, और जो राशि बचती है उसे फंड की कुल आउटस्टैंडिंग यूनिट्स से विभाजित कर दिया जाता है।
अगर किसी फंड के पास 100 करोड़ की संपत्ति है, 2 करोड़ की देनदारियाँ हैं और 10 करोड़ यूनिट्स चल रही हैं, तो उस फंड का NAV 9.80 रुपये प्रति यूनिट होगा। इसका मतलब उस दिन फंड की एक यूनिट की कीमत 9.80 रुपये है।
NAV रोज़ क्यों बदलती है?
NAV हर दिन बदलता है क्योंकि फंड जिन स्टॉक्स, बॉन्ड्स या अन्य सिक्योरिटीज़ में निवेश करता है, उनकी कीमतें भी रोज़ बदलती हैं। जब बाज़ार ऊपर जाता है तो फंड की संपत्ति का मूल्य बढ़ता है और NAV भी बढ़ जाती है। बाज़ार गिरता है तो NAV भी नीचे आ सकता है। आर्थिक माहौल, ब्याज दरों में बदलाव, बाज़ार की भावनाएँ और फंड में आने या निकलने वाला पैसा भी NAV को प्रभावित करता है। डिविडेंड या कैपिटल गेन की पेमेंट होने पर NAV थोड़े समय के लिए कम भी हो जाता है।
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Low NAV और High NAV: कौन सा बेहतर है?
बहुत से लोग मानते हैं कि कम NAV वाला फंड सस्ता होता है और ज़्यादा NAV वाला फंड महंगा, लेकिन यह सिर्फ एक भ्रम है।
कम NAV होने का मतलब यह नहीं कि फंड कमज़ोर है। ज़्यादा NAV होने का मतलब यह नहीं कि फंड बहुत अच्छा है।
कम NAV वाले फंड में आपको यूनिट्स ज़्यादा मिल सकती हैं और ज़्यादा NAV वाले फंड में कम, लेकिन कमाई दोनों जगह फंड के पोर्टफोलियो और उसकी बढ़त पर निर्भर करती है, न कि NAV के स्तर पर। इसलिए निवेश का फैसला NAV को देखकर नहीं बल्कि फंड की गुणवत्ता और आपके फाइनेंशियल गोल्स को ध्यान में रखकर करना चाहिए।
नीचे दिया गया उदाहरण देखे। (दोनों फंड्स ने 10% का रिटर्न दिया है ऐसा हमने यहा माना है)
NAV और Market Price में क्या अंतर है?
म्यूचुअल फंड का NAV केवल उसकी एक यूनिट की बुक वैल्यू बताता है। लेकिन ETF या क्लोज़-एंडेड फंड का मार्केट प्राइस स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग के दौरान मांग और आपूर्ति पर तय होता है। इसी वजह से ETF कभी NAV से ऊपर (premium) और कभी नीचे (discount) पर ट्रेड कर सकता है। म्यूचुअल फंड्स में खरीद-बिक्री हमेशा NAV पर होती है, जबकि ETFs मार्केट प्राइस पर खरीदे-बेचे जाते हैं।
कम NAV पर Units खरीदने से Tax पर क्या असर पड़ता है?
बहुत से निवेशक यह मानते हैं कि अगर NAV कम है तो टैक्स या रिडेम्पशन में फायदा मिलेगा, लेकिन यह गलत है।
टैक्स हमेशा आपकी खरीद और बिक्री के बीच हुए लाभ पर लगाया जाता है। रिडेम्पशन अमाउंट भी उसी दिन के NAV से निकाला जाता है, जिस दिन आप फंड बेचते हैं।
अगर फंड पर एग्जिट लोड लगता है तो वह भी रिडेम्पशन के समय ही लागू होता है। इसलिए खरीदते समय NAV कम या ज़्यादा होना टैक्स या रिटर्न को प्रभावित नहीं करता। असली असर फंड के प्रदर्शन और होल्डिंग पीरियड पर पड़ता है।
निवेशक के लिए NAV क्यों महत्वपूर्ण है?
NAV यह बताने में काम आता है कि फंड की मौजूदा यूनिट कीमत क्या है, लेकिन यह यह नहीं बताता कि फंड अच्छा है या बुरा।
अच्छा फंड चुनने के लिए उसके पोर्टफोलियो, पिछले रिटर्न, जोखिम, फंड मैनेजर के अनुभव और आपके निवेश उद्देश्य को देखना ज़रूरी है। NAV केवल मूल्य दिखाता है, परफॉर्मेंस नहीं।
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FAQs on NAV in Hindi
NAV क्या होता है?
NAV यानी नेट एसेट वैल्यू म्यूचुअल फंड की एक यूनिट की कीमत होती है। यह फंड की कुल संपत्ति में से उसकी देनदारियाँ घटाकर और कुल यूनिट्स से भाग देकर निकाला जाता है।
क्या कम NAV वाला फंड सस्ता और बेहतर होता है?
नहीं। कम NAV का मतलब सिर्फ यह होता है कि फंड की यूनिट कीमत कम है। इससे फंड के प्रदर्शन का कोई संबंध नहीं है। रिटर्न हमेशा फंड के पोर्टफोलियो और उसकी ग्रोथ पर निर्भर करता है।
NAV हर दिन क्यों बदलता है?
NAV बदलता है क्योंकि फंड जिन स्टॉक्स और बॉन्ड्स में निवेश करता है, उनकी कीमतें रोज़ बदलती रहती हैं। बाज़ार ऊपर जाता है तो NAV बढ़ता है और नीचे आता है तो NAV गिर सकता है।
क्या NAV देखकर म्यूचुअल फंड चुनना चाहिए?
नहीं। NAV सिर्फ यूनिट की कीमत दिखाता है। फंड चुनते समय आपको रिटर्न, पोर्टफोलियो क्वालिटी, जोखिम, फंड मैनेजर और अपने निवेश उद्देश्य को ध्यान में रखना चाहिए।
Disclaimer: म्यूचुअल फंड निवेश बाज़ार के जोखिमों के अधीन हैं। निवेश करने से पहले सभी स्कीम संबंधित दस्तावेज़ ध्यान से पढ़ें। पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता। बाज़ार स्थितियों के अनुसार निवेश का मूल्य बढ़ भी सकता है और घट भी सकता है। किसी भी निवेश से पहले अपने जोखिम स्तर, निवेश अवधि और आवश्यकता अनुसार वित्तीय सलाहकार की राय ज़रूर लें।